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छात्र अपनी शक्ति और प्रतिभाओं को पहचाने और किसी विशेष व्यक्ति जैसा बनने का प्रयास न करें बल्कि उससे अधिक गुणवान एवं प्रतिभाशाली व्यक्तित्व का स्वयं करें निर्माण, प्रत्येक परिस्थिति को चेलैंज के रूप में स्वीकार करें और उससे निपटने के लिए रहें संर्घषरत-जिलाधिकारी उमेश कुमार

                                                               

लोकतंत्र व्यवस्था के जनक अमरिका के राष्ट्रपति अब्रराहम लिंकन नहीं बल्कि वास्तविक कल्पना विश्व में सर्व प्रथम कालिदास द्वारा विश्व प्रसिद्व रचना “अभिज्ञान शाकुंतलम्“ पुस्तक में है स्पष्ट उल्लिखित, जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने इस गौरवशाली व्यवस्था को स्वस्थ, स्वच्छ और मजबूत बनाने के लिए युवाओं का किया आहवान

बिजनौर – जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने कहा कि आज का दिन भारत के इतिहास में बहुत महत्वपूर्ण दिन है, क्योंकि इसी तारीख को भारत निर्वाचन आयोग की स्थापना अमल में आई थी, इस दिन की महत्ता के दृष्टिगत पूरे भारतवर्ष में मतदाताओं को संविधान की शपथ ग्रहण कराई जाती है कि हम सब भारत के नागरिक अपने देश की लोक तांत्रिक व्यवस्था को स्वस्थ, स्वच्छ और सशक्त बनाने में अपनी भूमिका अदा करें और शत प्रतिशत रूप से अपने मताधिकार का प्रयोग करते हुए संसद में योग्य, ईमानदार और देश एवं राष्ट्र हित में कार्य करने वाले प्रतिनिधि को चुन कर भेजें। उन्होंने कहा कि आज पूरे विश्व में भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था की धाक एवं गरिमा है, जिसे बनाए रखने और उसे और मजबूत करने में हम सबको अपनी भूमिका निभानी है।
जिलाधिकारी श्री मिश्रा बुधवार को स्थानीय काॅलेज में मतदाता दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में सम्बोधित करते हुए अपने विचार व्यक्त कर रहे थे।
उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित छात्र एवं छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि वे अपनी शक्ति और प्रतिभाओं को पहचाने और किसी विशेष व्यक्ति जैसा बनने का प्रयास न करें बल्कि उससे अधिक गुणवान एवं प्रतिभाशाली व्यक्तित्व का स्वयं निर्माण करें। उन्होंने कहा कि प्रतिकूल परिस्थितियां व्यक्ति को शक्तिशाली बनाने के लिए ही सामने आती हैं, प्रत्येक परिस्थिति को चेलैंज के रूप में स्वीकार करें और उससे निपटने के लिए संर्घषरत रहें। उन्होंने कहा कि इतिहास वही लोग लिखते हैं जो कठिन प्रतिस्थितियों में भी कार्य करते हुए अपना रास्ता बनाते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें गर्व होना चाहिए कि विश्व में लोकतांत्रिक व्यवस्था का जनक अमेरिका नहीं बल्कि भारत है, कालिदास द्वारा रचित अभिज्ञान शाकुंतलम पुस्तक में स्पष्ट उल्लेख है कि जब कण्व की पत्नी शकुंतला को राजा दुष्यंत के राजमहल में लेकर जाती है तो कहती है कि हमें रात में भी राजा को जगाने का अधिकार है, क्योंकि यह लोकतंत्र है। उन्होंने कहा कि वास्तविक रूप से लोकतांत्रिक व्यवस्था के जनक अमेरिका के राष्ट्रपति नहीं बल्कि महाकवि कालिदास हैं।
कार्यक्रम के आखिर में उन्होंने सामुहिक रूप से शपथ ग्रहण कराते हुए कहा कि “हम, भारत के नागरिक, लोकतंत्र में अपनी पूर्ण आस्था रखते हुए यह शपथ लेते हैं कि हम, अपने देश की लोकतांत्रिक परम्पराओं की मर्यादा को बनाये रखेंगे तथा स्वतंत्र, निष्पक्ष एंव शांतिपूर्ण निर्वाचन की गरिमा को अक्षुण रखते हुए निर्भीक होकर धर्म, वर्ग, जाति, समुदाय, भाषा अथवा अन्य किसी भी प्रलोभन से प्रभावित हुए बिना सभी निर्वाचनों में अपने मताधिकार का प्रयोग करेगें।“
इस अवसर पर उप जिलाधिकारी मोहित कुमार, विवेक काॅलेज के स्वामी अमित कुमार गोयल सहित काॅलेज के शिक्षकगण एवं छात्र-छात्राएं मौजूद थीं। 

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