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चेला नंबर वन- छुटभैया ने फेल किया; मेरा रंग दे बसंती चोला

वो खुद माहिर है रंग बदलने में… ।
जी हां, सोलह आने सच है ये बात। कुछ समय पहले तक राष्ट्रीय स्तर के जनप्रतिनिधि का चेला बनकर सत्ता की मलाई चाटने वाला नई राह पर है। अब वह प्रदेश स्तर के (…और की और के) खास नुमाइंदों को पछाड़ कर चेला नंबर वन बन चुका है। वैसे भी पहली वाली घरवाली को छोड़कर निचली वाली को हमराह बनाकर खासी रकम बटोर रहा है। शहर में गंदगी फैली रहे, लेकिन अपने लिबास की चकमक का खासा ध्यान रखना आदत में शुमार है।

ये जो “के” और “की” हैं, इनका का खेल भी अजब गजब बताया जाता है। जब यूपी की सर्वेसर्वा मैडम जी थीं, तब “के” साहब को उनकी औकात हिंदी में याद दिलाई गई थी। जलेबियों के लिए बहुत ज्यादा मशहूर चौराहे पर मैडम जी के जिला स्तर के पदाधिकारी के गाड़ी चालक ने सरेआम उनकी मां-बहनों को बेहतरीन अंदाज में याद करते हुए बीच सड़क से चलता कर दिया। फिर एक दौर ऐसा भी आया कि बिल्ली के भाग्य से छींका फूटा। “के” साहब के ऐसे पंख निकले कि नेतागिरी को एक नया अंजाम दे डाला।

मोदी योगी जी की भी लानत_मनानत करते हैं “की” के ये “के”: ये भी बिलकुल सौ फीसदी सच है कि “की” के ये “के” देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी ऊपर खुद को मानते हैं। एक मामले में उनके दर पर पहुंचे खबरनवीस के सामने वो तो हत्थे से ही उखड़ गए। दोनों ही महानुभावों को उनकी नीतियों को लेकर जमकर गरियाने लगे।

…और रही बात छुटभैया की… तो मजाल है कि कोई उनके सामने “चूं” तक कर सके। कुछ ही साल में जलेबियां तार कर रंक से राजा बने “भाई जी” के दर पर सलाम बजाते भले ही शुगर का मरीज बन जाए, परवाह नहीं। लोगों की हैल्थ की फ़िक्र करने वाले भीमकाय की हैल्थ को भी जमकर चट कर डाला। यही नहीं फोटो प्रेम भी रग-रग में घुसा है उनकी। मीडिया के कैमरों की आंखों में कैद होने के लिए कूद कर भइया जी खुद को किसी न किसी प्रकार फिट कर ही लेते हैं।

अब कुछ दर बदर की भी…: इन सब के मास्टर माइंड फिलहाल दर बदर भटकते हुए चापलूसों को दरकिनार कर सर्वेसर्वा बन बैठे हैं। आसमान और पाताल के बीच इनका खेल बखूबी चल रहा है।

राम नाम जपना, पराया माल अपना की तर्ज पर वीर तुम बढ़े चलो अभियान अभी जारी है। …और वो पिछले वाले जाने कहां गए वो दिन को याद कर मन मसोसे बैठे हैं।


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